*अदालत और राजस्व विभाग से जीत के बाद भी जमीन पाने दर-दर भटक रहा पीड़ित परिवार*
छतरपुर। शहर मैं अभी तक भू माफियाओं द्वारा सरकारी जमीनों को प्राइवेट बनाकर आवासीय भूखंड में बेचा जा रहा है लेकिन अब तो पैतृक जमीनों पर भी जबरन अतिक्रमण का ग्रहण लग चुका है और पीड़ित परिवार अपने पूर्वजों की जमीन पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है यहां तक की अदालत सहित राजस्व विभाग से जीत मिलने के बाद भी पीड़ित परिवार अपनी जमीन पर कदम नहीं रख पा रहा है। ग्राम सौंरा निवासी रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी तने स्वर्गीय स्वामी प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि उनकी जमीन पर गांव के ही बृज किशोर दुबे ने पुत्रों टाइगर दुबे गणेश दुबे सहित दामाद के साथ मिलकर उनकी पैतृक जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया है और विगत 25 सितंबर को उक्त जमीन की जुताई कर दी, अतिक्रमणकारियों को मना करने पर उनके द्वारा पीड़ित परिवार को ना केवल गाली गलौज की गई यहां तक की जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया गया जिसकी शिकायत पीड़ित द्वारा थाना ओरछा रोड पुलिस में की गई है।
*55 साल से है पिता व चाचा के नाम*
रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि जिस जमीन पर बृज किशोर दुबे द्वारा जबरन कब्जा कर लिया गया है वह जमीन राजस्व विभाग में वर्ष 1966 से उनके पिता व चाचा के नाम दर्ज है और उसके बाद उनके नाम आ गई जिसके संपूर्ण दस्तावेज है। इस जमीन पर कब्जा को लेकर जो विवाद पैदा हुआ था उसका निराकरण भी हो चुका है यह मामला तहसील न्यायालय एसडीएम कोर्ट जिला न्यायालय शहर जबलपुर उच्च न्यायालय में विचाराधीन हो चुका है और इस मामले में दूसरे पक्ष द्वारा की गई अपील को कोर्ट द्वारा निरस्त किया गया है इसके बाद भी कब्जा धारी कब्जा ना छोड़ते हुए दबंगी दिखा रहे हैं।
*कब्जा धारियों से नहीं कोई पारिवारिक रिश्ता*
पीड़ित रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि कब्जा धारी बृज किशोर दुबे से हमारा कोई पारिवारिक रिश्ता नहीं है उनका यह कहना गलत है कि वह हमारे परिवार का हिस्सा है जबकि मेरे दादा भगवान दास दुबे के 2 पुत्र छिमादर दुबे एवं चुरामन दुबे थे। चुरामन दुबे की पत्नी की मौत हो गई थी उनके कोई बच्चे नहीं थे इसके अलावा उन्होंने दूसरा विवाह भी नहीं किया। अब रही बात बृज किशोर दुबे की तो उनके पिता की बंदूक की लाइसेंस में उनके पिता का नाम गणपत लोहार लिखा हुआ है वही बृज किशोर दुबे का विवाह राजनगर थाना के तिलोन्हा गांव में चिरौंजीया पुत्री कलुआ लोहार के घर हुआ है।
अब्दुल रईश पत्रकार छतरपुर